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भाजपा सरकार के किसान-विरोधी तीन काले कानूनों, दमनकारी नीतियों व फैसलों के खिलाफ प्रतिरोध आन्दोलन गठित करने के लिये 250 किसान संगठनों के विशाल मंच – ऑल इण्डिया किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने, ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन जिसका शुरू से ही सरगर्म भागीदार है, 25 सितम्बर को ग्रामीण भारत बन्द का आह्वान किया है

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          ललित कुमार घोष की रिपोर्ट

भाजपा सरकार के किसान-विरोधी तीन काले कानूनों, दमनकारी नीतियों व फैसलों के खिलाफ प्रतिरोध आन्दोलन गठित करने के लिये
250 किसान संगठनों के विशाल मंच – ऑल इण्डिया किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने, ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन जिसका शुरू से ही सरगर्म भागीदार है, 25 सितम्बर को ग्रामीण भारत बन्द का आह्वान किया है
           कोलकाता 20 सितम्बर 2020

देशभर के किसानों द्वारा लंबे अरसे से उठाई जा रही “कर्ज से मुक्ति और और फसलों की लागत से डेढ़ गुणा लाभकारी दाम” देने की दो प्रमुख मांगों को अनदेखा कर केंद्र की भाजपा सरकार ने कोरोना-लॉकडाउन की विकट स्थिति का दुरुपयोग करते हुए गत 5 जून को किसान-विरोधी तीन काले अध्यादेश थौप दिए थे। इनके खिलाफ गांव से लेकर संसद तक उठी आवाज की निर्लज्जता से उपेक्षा कर किसानों, खासकर छोटे व मध्यम किसानों की कीमत पर भाजपा सरकार द्वारा देशी-विदेशी कोरपोरेट कम्पनियों के स्वार्थ में इन तीनों अध्यादेशों को कानूनी शक्ल दिये जाने का ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन कड़ी निंदा करता है।

‘आवश्यक वस्तु कानून 1955’ में संशोधन कर भाजपा सरकार ने भोजन के लिए जरूरी सभी अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, आलू व प्याज छ: तरह की चीजों के स्टाक को चाहे जितनी मात्रा में जमा करने की अनुमति दे दी है। साफ जाहिर है कि व्यापारिक कंपनियां किसानों से इन अावश्यक वस्तुओं को सस्ते दामों पर खरीद कर अपने गोदामों में इन्हें भारी मात्रा में जमा कर सकेंगी और बाजार में बनावटी कमी दिखाकर उन्हें महंगे दामों पर बेच कर अथाह मुनाफा अर्जित कर सकेंगी। किसानों के साथ-साथ इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा। इससे देश में पहले ही से ही कायम भयंकर कुपोषण व भुखमरी और भी ज्यादा बढ़ेगी।


‘कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य संवर्धन और सरलीकरण विधेयक, 2020’ को पारित करा कर उन सभी प्रावधानों को समाप्त कर दिया जो अभी तक एपीएमसी एक्ट में किसानों के पक्ष थे। इसमें सरकारी नियंत्रण वाली वर्तमान कृषि मंडियों को तो सिर्फ मण्डी स्थल के भीतर सीमित कर दिया गया है परन्तु प्राइवेट कृषि मंडियों का जाल पूरे देश में फैलाने की अनुमति दे दी गई है जिसका मालिकाना बड़ी बड़ी कम्पनियों के हाथ में होगा। मंडी से बाहर वे ही किसानों से उनकी जिन्स कहीं भी खरीद सकेंगी। दलील यह दी जा रही है कि इससे किसान आढ़ती बिचौलियों से ‘आजाद’ हो गए हैं, किसानों को उनसे बचने का ‘रक्षा कवच’ मिल गया है। यह दलील बिल्कुल कोरी सफेद झूठ व छल भरा प्रचार है। सरकारी मंडियों से बाहर ‘एक राष्ट्र – एक मंडी’ के नारे के तहत जो दिग्गज कॉरपोरेट कंपनियां किसानों की फसल खरीदेंगी, क्या वे फकीर हैं? क्या वे व्यापारी नहीं हैं? वे मौजूदा कृषि मंडी के आढ़तियों से हजारों गुणा बड़े व्यापारी हैं। इन देशी कोरपोरेट कम्पनियों का दुनिया के दूसरे देशों की लुटेरी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से गठजोड़ है। ये ही कंपनियां फसल की क्वालिटी – ए, बी, सी आदि ग्रेड तय करेंगी और अपनी मर्जी के रेट पर फसल खरीदेंगी। असल में, इस नये कानून में अगर ‘रक्षा कवच’ मिला है तो सिर्फ इन प्राइवेट कंपनियों को मिला है। जैसे सरकारी स्कूलों के पूरे ढ़ांचे को ध्वस्त कर आज मंहगे प्राइवेट स्कूलों का जाल बिछा दिया गया है, उससे भी बुरा होने जा रहा है सरकार नियन्त्रित कृषि मण्डियों समेत पूरे बुनियादी ढांचे को ध्वस्त कर और जमाखोरी को खुली छूट देकर कृषि बाजार तन्त्र पर बड़ी कम्पनियों का कब्जा होने पर। खाद्य सुरक्षा की पूरी कतार ही खतरे में पड़ जायेगी।

‘कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन व कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020’ के माध्यम से अब कॉरपोरेट कंपनियां, थोक व्यापारी, बड़े बड़े खुदरा विक्रेता, निर्यातक व वायदा (सट्टा) बाजार अपने व्यापार की जरूरत से किसानों से खुद खेती करवायेंगे। एक करार के तहत वे कृषि सेवा के नाम पर किसानों को कर्ज, खाद, बीज, औजार और खेती संबंधी जानकारी-हुनर उपलब्ध करायेंगी। बदले में, किसान को अपनी फसल कंपनी को ही बेचनी पड़ेगी। कंपनी किस रेट पर खरीदेगी – यह बुवाई से पहले ही करार में तय करना होगा। यह करार एक फसल से लेकर पांच साल या इससे भी ज्यादा की अवधि का हो सकता है। खेत में क्या बोयें, कहां बेचें – यह सब किसान के हाथ में नहीं रहेगा। ऐसे में, ‘एक राष्ट्र-एक मंडी’ कहीं नजर नहीं आयेगी, जिसके इतने ढ़ोल पीटे जा रहे हैं। फसल बिक्री के बाद कंपनी पहले अपने कर्ज व अन्य सेवाओं की रकम चुकता करेगी। किसान के हाथ में कितने दाम आएंगे, कोई नहीं जानता।
अदालत जाने पर रोक है। अंग्रेजों को नील की खेती कराने के लिए जो दमन करना पड़ा था, वह कार्य सहज ही में ठेका खेती प्रणाली से पूरा कर लिया जाएगा। एक तरफ, एक-डेढ़-दो एकड़ के छोटे व मध्यम किसान होंगे और दूसरी तरफ दैत्याकार ये विशाल कम्पनियां होंगी। इन पर कोई पाबन्दी नहीं होगी, बल्कि सरकारी कानून की ताकत इनके साथ होगी। छोटे किसान धीरे-धीरे कंपनियों की मुट्ठी में आ जायेंगे। अब तक का अनुभव तो यही बताता है।

लिहाजा, इन हालात में खेती करना और जीना दुश्वार हो जायेगा। पहले ही चार लाख किसान व खेत मजदूर पूंजीपतियों, कारपोरेट घरानों की लूट-खसोट के कारण आत्महत्या कर चुके हैं।
बचने का एक ही रास्ता है, वह है आन्दोलन का रास्ता। ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन आजादी के बाद से ही इस कार्य में जुटा है। भाजपा सरकार के किसान-विरोधी तीन काले कानूनों, दमनकारी नीतियों व फैसलों के खिलाफ प्रतिरोध आन्दोलन गठित करने के लिये
250 किसान संगठनों के विशाल मंच – ऑल इण्डिया किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने, ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन जिसका शुरू से ही सरगर्म भागीदार है, 25 सितम्बर को ग्रामीण भारत बन्द का आह्वान किया है। पंजाब, हरियाणा समेत पूरे देश में इसे सफल बनाने के लिये हम तमाम शोषित-पीड़ित किसान खेत मजदूरों, गरीब मेहनतकशों से पुरजोर अपील करते हैं।

लालू यादव ने कहा कि ,प्रिय रघुवंश बाबू! ये आपने क्या किया? इतनी दूर चले गए।       

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लालू यादव ने कहा कि ,प्रिय रघुवंश बाबू! ये आपने क्या किया? इतनी दूर चले गए।                                रिपोर्ट: नसीम रब्बानी                                          बिहार: पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉक्टर रघुवंश प्रसाद सिंह का निधन से पूरा बिहार ही नही पूरा देश शोकाकुल है। उन्होंने रविवार को दिल्ली एम्स में आखिरी सांस ली। शनिवार को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जीवन रक्षा प्रणाली पर रखा गया था। डॉक्टर सिंह के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने शोक व्यक्त किया है।


पूर्व केंद्रीय मंत्री के निधन पर दुख जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने कहा, ‘रघुवंश प्रसाद सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। मैं उनको नमन करता हूं। उनके निधन ने बिहार के साथ-साथ देश के राजनीतिक क्षेत्र में एक शून्य छोड़ दिया है। जमीन से जुड़ा व्यक्तित्व, गरीबी को समझने वाला व्यक्तित्व, पूरा जीवन बिहार के संघर्ष में बिताया। रघुवंश जी के भीतर अपने क्षेत्र के विकास की चिंता थी.

वहीं लालू यादव ने कहा कि मैनें परसों ही आपसे कहा था आप कहीं नहीं जा रहे हैं। लेकिन आप इतनी दूर चले गए। उन्होंने लिखा, ‘प्रिय रघुवंश बाबू! ये आपने क्या किया? मैनें परसों ही आपसे कहा था आप कहीं नहीं जा रहे है। लेकिन आप इतनी दूर चले गए। नि:शब्द हूं। दुःखी हूं। बहुत याद आएंगे।’

बिहार की वैशाली लोकसभा सीट से सांसद रहे रघुवंश प्रसाद का जन्म छह जून 1946 को वैशाली के ही शाहपुर में हुआ था। उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय से गणित में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी। अपनी युवावस्था में उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए आंदोलनों में भाग लिया था।

1973 में उन्हें संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का सचिव बनाया गया था। 1977 से लेकर 1990 तक वे बिहार राज्यसभा के सदस्य रहे थे। 1977 से 1979 तक उन्होंने बिहार के ऊर्जा मंत्री का पदभार संभाला था। इसके बाद उन्हें लोकदल का अध्यक्ष बनाया गया था। 1985 से 1990 के दौरान वे लोक लेखांकन समिति के भी अध्यक्ष रहे।


1990 में उन्होंने बिहार विधानसभा के सहायक स्पीकर का पदभार संभाला था। 1996 में पहली बार वे लोकसभा के सदस्य बने। 1998 में वे दूसरी बार और 1999 में तीसरी बार लोकसभा पहुंचे। इस कार्यकाल के दौरान वे गृह मामलों की समिति के सदस्य रहे।

2004 में श्री रघुबंश सिंह चौथी बार लोकसभा पहुंचे। 23 मई 2004 से 2009 तक वे ग्रामीण विकास के केंद्रीय मंत्री रहे। 2009 के लोकसभा चुनाव में लगातार पांचवी बार उन्होंने जीत दर्ज की। हालांकि ।

भारत के वेंकट को स्विट्जरलैंड में मिली डॉक्टरेट की उपाधि।

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भारत के वेंकट को स्विट्जरलैंड में मिली डॉक्टरेट की उपाधि।                                                                            रिपोर्ट: सेराज अहमद क़ुरैशी

स्विट्जरलैं।

भारत के आईआईटियन वेंकट कपिल को स्विट्जरलैंड के इकोले पॉलिटेक्निक फेडरल डी लाजेन (स्विस फेडरल तकनीकी संस्थान) द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि दी गई हैं। 24 अगस्त 1993 को जन्मे वेंकट कपिल मूलतः भारत के रहने वाले हैं। प्रयागराज से उनका गहरा नाता रहा हैं। वेंकट की प्रारंभिक शिक्षा प्रयागराज में सेंट जोसेफ व गंगा गुरुकुलम फाफामऊ में हुई हैं। शुरू से ही मेघावी छात्र रहे वेंकट कपिल ने आईआईटी कानपुर से डिग्री हासिल किया और स्विट्जरलैंड चले गये जहां वो इकोले पॉलिटेक्निक फेडरल डी लाजेन (स्विस फेडरल तकनीकी संस्थान) अध्ययनरत रहे। वेंकट कपिल के पिता शैलेंद्र कपिल भारतीय रेल सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं और उनकी माँ डॉक्टर रूपा कपिल भी रेलवे की चिकित्सा सेवा में वरिष्ठ पद पर तैनात हैं। लम्बे समय तक दोनों यहाँ उत्तर मध्य रेलवे जोन में सेवा दे चुके हैं और इन दिनों ईस्ट कोस्ट रेलवे जोन भुवनेश्वर में नियुक्त हैं। वेंकट कपिल ने अपना पीएचडी न्यूक्लियर क्वांटम इफेक्ट फ़ास्ट एंड एक्यूरेट पर किया हैं। शुक्रवार की देर शाम स्विट्जरलैंड के इकोले पॉलिटेक्निक फेडरल डी लाजेन (स्विस फेडरल तकनीकी संस्थान) लाजेन में वेंकट कपिल ने अपने थीसिस न्यूक्लियर क्वांटम इफेक्ट फ़ास्ट एंड एक्यूरेट पर विशेषज्ञ प्रोफेसर और अपने गाइड की उपस्थिति में प्रेजेंटेशन दिया। पूरे थीसिस प्रेजेंटेशन के दौरान भारत में भी लोग इंटरनेट के द्वारा सीधा प्रसारण देखते रहे। वेंकट के थीसिस प्रेजेंटेशन के बाद उनको डॉक्टरेट की उपाधि दी गई। उनके पिता शैलेंद्र कपिल माँ रूपा कपिल ने इस पल को बहुत गौरवशाली बताया और देश का नाम शिक्षा के छेत्र में ऊँचा करने के लिए बेटे को बधाई दी। वेंकट के संस्थान के प्रोफेसर व साथियों ने भी उन्हें इस उपलब्धि के लिये बधाई दी। उल्लेखनीय हैं कि इकोले पॉलीटेक्निक फेडरल डी लॉज़ेन (स्विस फेडरल तकनीकी संस्थान, लाजेन फ्रेंच स्विटजरलैण्ड के लॉज़ेन नगर में स्थित एक अनुसंधान विश्वविद्यालय है। इसकी विशेषज्ञता भौतिक विज्ञानों तथा इंजीनियरी के क्षेत्र में है। दुनिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों में इस संस्थान की गणना होती है। क्यू एस विश्वविद्यालय रैंकिंग के अनुसार सभी विश्वविद्यालयों में इकोले पॉलिटेक्निक फेडरल डी लाजेन का स्थान 14वाँ है जबकि केवल इंजीनियरी विश्वविद्यालयों में इसका स्थान पूरी दुनिया में 17वाँ है।

गणेशजी की प्रतिमाएं एवं ताजियो की ऊचाई 4 फुट करने की अनुमति दी जाए। रिपोर्ट:सनोवर खान

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गणेशजी की प्रतिमाएं एवं ताजियो की ऊचाई 4 फुट करने की अनुमति दी जाए।                                      रिपोर्ट:सनोवर खान            गणेशजी की प्रतिमाएं एवं ताजियो की ऊचाई 4 फुट करने की अनुमति दी जाए। रिपोर्ट:सनोवर खान ग्वालियर (मध्यप्रदेश)राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मुस्लिम कल्याण संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जकी उर रहमान खाँन के नेतृत्व मे ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति महोदय .. प्रधानमंत्री महोदय ..मुख्यमंत्री महोदय एवं कलेक्टर ग्वालियर को ज्ञापन देकर माँग की गई कि गणेशजी की प्रतिमाएं एवं ताजियो की ऊचाई 4 फुट करने की अनुमति दी जावे तथा पूर्व से जिस स्थान पर रखे जाते है उसी स्थान पर रखने की अनुमति और ताजियो को दफन करने के लिए बडे बडे गड्डे खुदवाये जाये। माँगे नही मानने की दशा मे 17 अगस्त को धरना भूख हडताल पूरे देश मे की जावेगी ।
ज्ञापन राष्ट्रीय अध्यक्ष जकी उर रहमान खाँन के साथ शरीफ उद्दीन नियाजी.. इदरीस खाँन.. डा. राशिद अली हैदरी..वसीम खाँन नियाजी . दिलशाद खाँन हबीब खाँन.. इमरान खाँन ने दिया।

لاک ڈاؤن میں ضرورت مندوں اور غریبوں کی مدد کو جو طبقہ سب سے پہلے سامنے آیا وہ نوجوانوں کا طبقہ ہے.

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لاک ڈاؤن میں ضرورت مندوں اور غریبوں کی مدد کو جو طبقہ سب سے پہلے سامنے آیا وہ نوجوانوں کا طبقہ ہے…………. लॉक डाउन में जरूरत मंदों और गरीबों की मदद को जो तब्क़ा सबसे पहले सामने आया वह नवजवान का तब्क़ा है। .टिकिया पारा ,हावड़ा ٹکیہ پارا هورہ کے سماجی تنظیم یوتھ فار آل نے مرکزی حکومت کے لوک ڈاؤن اعلان کو بھاپ لیا اس لاک ڈاؤن سے اگر سب سے زیادہ کسی کو نقصان وہ غریب اور یومیہ مزدوروں کو ہوگا یوتھ فار آل کے جنرل سکریٹری ندیم شہزادہ نے اپنی پوری ٹیم کو ساتھ جنگی پیمانے پر فلاحی کام میں جوٹ گئے غریبی کی سطح سے نیچے زِندگی گزارنے والوں کو ادارے کی جانب سے تلاش کر اور خاص کر مزدور طبقہ کے گھر اناج اور غلہ پہنچایا جا رہا ہے ہےادارے کی جنرل سیکرٹری ندیم شہزادہ نے اس ضمن میں مزید جانکاری دیتے ہوئے کہا کہ ادارے کی جانب سے سے پوری کوشش کی جاری ہے ہے کہ ایک گھر بھی ایسا نہ ہو جہاں ہمارا امدادی سامان نہ پہنچے ساتھ ہی ساتھ وارڈ نمبر 19 اور 20 کے پورے گلی اور چوراہے کو سینیٹ ایز بھی کیا گیا۔یہ کام لوگ ڈاؤن سے لے کر اب تک جاری ہےاس کے علاوہ ہورہ اسٹیشن سیالدہ اسٹیشن پر پھنسے ہوئے لوگوں کو اور بانکڑا کے لوگوں کو پکا ہوا کھانا بھی فراہم کر رہے ہیں۔کارپوریشن کے صفائی مزدوروں کو بھی راشن کے علاوہ تولیہ مبلغ 500 روپے کرکے دیا گیا۔ قدم تکلا ٹرافک پولیس اور هوره پولیس کو سینیٹ ایز اسپرے مگ بھی فراہم کیا گیا ۔ گویا کے اس لوک ڈاؤن میں ڈیوٹی کرنے والے صفائی مزدوروں سے لے کر پولیس والوں کا بھی خیال کیا گیا۔
کارپوریشن کے اہلکاروں اور پولیس عملہ نے اس ٹیم ورک کی ستائش کی۔
لاک ڈاؤن مزید دو ہفتوں کی توسیع کی وجہ لوگوں میں بیچینی کو دیکھتے ہوئے سیکرٹری ندیم شہزادہ نے مزید اناج اور رمضان کیت گھر گھر تک پہنچانے کا انتظام کیا۔ساتھ ہی ساتھ لوگوں کی سہولت کے لیے ایمبولینس کا بھی انتظام کیا گیا۔Report.Haidar Ali

राज्यों की सीमाएं सील कर प्रवासी मजदूरों की आवाजाही पूरी तरह रोकी जाए : केंद्र सरकार

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राज्यों की सीमाएं सील कर प्रवासी मजदूरों की आवाजाही पूरी तरह रोकी जाए : केंद्र सरकार

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि जो लोग भी लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए एक जगह से दूसरी जगह गए हैं, उन्हें कम से कम 14 दिन के लिए आइसोलेट किया जाएगा यह निर्देश सभी राज्य सरकारों को जारी कर दिया गया है. आपूर्ति भी जारी रहे इस पर भी कोशिश जारी है और जरूरी कदम भी उठाए जा रहे हैं लेकिन इस बीच देखा गया है कि प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में एक जगह से दूसरी जगह गए हैं सभी राज्यों सरकारों को सीमाएं सील रखने के लिए कहा गया है. सभी राज्यों को यह भी कहा गया है कि हाइवे पर भी किसी तरह का आवगमन नहीं होना चाहिए
जरूरत मंदों को खाना और आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था की जाए इसके साथ ही नोटिस में यह भी साफ तौर पर कहा गया कि जो लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर एक जगह से दूसरी जगह गए हैं उनको कम से कम 14 दिन के लिए आइसोलेशन में रख निगरानी भी बनाए रखी जाए इसके साथ ही सभी राज्यों को इस बात का भी निर्देश दिया गया है कि मजदूरों को उनकी मेहनत का पैसा समय से मिलता रहे और इसमें कोई कटौती नहीं होने पाए किसी भी मजदूर इस समय घर का किराया न मांगा जाए जो लोग छात्रों और मजदूरों से कमरा या घर खाली करने के लिए कहते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो
गौरतलब है कि 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान होते ही बड़ी संख्या में कामगार मजदूर अपने घरों की ओर पलायन करने लगे हैं हालांकि सरकार की ओर से बार-बार अपील की जा रही है कि उनके लिए पूरा इंतजाम किया जाएगा लेकिन मजदूरों का कहना है कि जो भी समस्या होगी परिवार के साथ झेला जाएगा. हालात ये हो गए हैं कि जयपुर दिल्ली एनसीआर से बड़ी संख्या में कामगार और मजदूर पैदल ही अपनों घरों की ओर जा रहे हैं

प्रशासन और आम जन दोनों की असंवेदनशीलता, कहीं भारी ना पड़े देशवासियों को

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कोविट-19 मात्र एक दिन की जागरूकता के बाद क्या ख़तरा टल गया
प्रशासन और आम जन दोनों की असंवेदनशीलता, कहीं भारी ना पड़े देशवासियों को

ए एस ख़ान
लखनऊ विश्वव्यापी महामारी कोविट-19-कोरोना वायरस को भारत में फैलने से रोकने हेतु जहां केन्द्र और प्रांतीय सरकारों ने दिन रात एक किए हुए हैं, वहीं आमजन, और प्रशासन मात्र इसे सांकेतिक दिशानिर्देश मानकर आचरण कर रहा है, जिसके कारण देश एक भीषण त्रासदी की ओर बढ़ता दिख रहा है ।
कोरोना के कहर की तस्वीरें और ख़बरें विदेशों से लगातार समाचार पत्रों एवं सोषल मीडिया के माध्यम से सामने आ रही है किंतु भारतीयों ने शायद इसे ठीक से समझना नहीं चाहा, या यूं समझो की वे इसे मात्र कुछ पलों के संकट के रूप में लेरहे है ।
वर्ना प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों, सहित अनेकों जागरुक लोगों की अपीलों, निवेदनों, के बाद भी आम आदमी जागरूकता का परिचय नहीं दे रहा है
देश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर रवीवार 22 मार्च को जनता कर्फ़यू के दौरान दिन भर पूरे देश में अभूतपूर्व समर्थन मिला तथा देशवासी घरों में कैद रहे, यह देखकर एक सुखद अहसास हुआ कि जनता जागरूक है तथा कोरोना को हराया जा सकता है ।
किंतु शाम होते ही यह भ्रम टूट गया ।
देश में इस आपदा की घड़ी में जान जोखिम में डालकर फ्रंट लाइन पर कार्य कर रहे डाक्टरों, प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ सेवाओं से जुड़े तथा प्रशासनिक कर्मचारियों, एवं एसी नाज़ुक घड़ी में भी समाचारों का संकलन करने हेतु निकलने वाले मीडिया कर्मियों के उत्साहवर्धन हेतु थाली तथा ताली बजाने के निवेदन को समाज ने ऐसे मनाया मानो कोरोना का विनाश कर जश्न मना रहे हों ।
जगहां जगहां जुलूसों के रूप में भीड़ के साथ थाली,घंटा, बजाते लोगों ने तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर स्वंय को यौद्धा साबित करने के प्रयास किए ।
ऐसा लगा कि जैसे ये प्रधानमंत्री की अपील का मज़ाक उड़ाकर कोरोना को दावत दे रहे हैं ।
यही नहीं दूसरे दिन सोमवार को भी आमजन ने घोर लापरवाहियां जारी रखीं, लोग सड़कों पर भी निकले, गलियों में मजमा भी लगा दुकानें भी खुलीं तथा भीड़भाड़ भी रही ।
इस दौरान प्रशासन केवल व्यसत सड़कों पर एवं चौराहों पर ही सख़्ती करता दिखा जहां से अधिक तर मीडिया कर्मी, एवं आवश्यक वस्तुओं को लेजाने वालों के वाहन ही निकल रहे थे ।
कोरोना की विभीषिका की जितनी अनदेखी आमजन कर रहा है, उतनी ही प्रशासन विषेश कर पुलिस प्रशासन भी ।
समाचारों का संकलन करने निकले पत्रकारों से पुलिस का व्यवहार अनूकूल नहीं था ।
दूसरी ओर स्वासथ सेवाओं से जुड़े अधिकारी,कर्मचारी, एवं आला प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद सजगता तत्परता, से अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह करते दिखे, जिसमें लखनऊ जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, कमिश्नर, एवं सहयोगीयों की कार्यशैली सराहनीय रही ।
वहीं थाना चौकी स्तर के पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली कहीं से संतोषजनक नहीं दिखी ।
आमजन एवं प्रशासन के इस उदासीन रवैए, एवं हठधर्मिता के चलते कैसे कोरोना काबू में आयेगा, ये चिंता का विषय है ।
क्या ही अच्छा हो की संवेदनशील परिस्थितियों में गठित की जाने वाली शांती कमेटियों की तरह मोहल्ला वार जागरूकता कमेटियों के माध्यम से गली गली जागरूकता अभियान चलाया जाता, तथा थाना चौकी स्तर पर निरंतर गश्त का विषेश कर गलियों में निरंतर चौकसी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती ।
कोरोना का रोना मात्र एक दिन का नहीं था जिसे ताली,थाली,घंटा, बजाकर मिटा दिया गया ।
यह मौत बनकर समूचे विश्व पर मंडरा रहा है तथा यह सीमाएं, धर्म,जाती, वर्ग, नहीं देखता बल्की पूरी मानवता को ग्रास बनाना चाहता है, और भारत भी इसकी चपेट में है ।
कोरोना का मात्र जागरूकता से हराया जा सकता है और प्रशासन के निर्देश वैज्ञानिक आधार पर हैं इन्हें मानकर ही इस आपदा से मुक्त हो सकते हैं ।
अन्यथा त्रासदी निश्चित है ।

कोरोना वायरस को लेकर सभी देशवासियों से एस- के – के- न्यूज की ओर से अपील ।

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देवबंद -सहारनपुर
कोरोना वायरस को लेकर सभी देशवासियों से एस- के – के- न्यूज की ओर से अपील ।
कोरोना वायरस से बचाव को लेकर जागरूकता की मुहिम शुरू की गई हैं । कोरोना वायरस से बचाओ के लिए सामाजिक दूरी ही सबसे जरूरी है। आप सभी देशवासियों से निवेदन करते हैं। कि जितना हो सकें अपने घर के अंदर ही रहे । हाथ मिलाने से परहेज करें । दिन में कई बार सैनिटाइजर या साबुन से हाथों को धोएं । लाॅकडाउन में आप सभी से सहयोग की अपील करते हैं। आप सभी घर के अंदर ही रहे। घर से बाहर जरूर काम के लिए ही निकले जितना हो सकता हो उतना बचे कही भी ज्यादा लोगो मे न तो आप हो और दूसरों को भी समझाओ बार बार साबुन या एंटीसेप्टिक लिकविड से हाथ धोते रहे कोरोना वायरस के संक्रमण के खिलाफ जंग में हर व्यक्ति की सहभागिता बेहद अहम होगी ।हम आप सभी से अपील करते हैं ।लाॅकडाउन में अपना सहयोग करें। और अपने घरो में ही रहें।
मनोज त्यागी

जदयू के लेटर पैड पर किया कंप्लेंन तो पटना जिला अधिकारी के द्वारा कार्यवाही शून्य।

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जदयू के लेटर पैड पर किया कंप्लेंन तो पटना जिला अधिकारी के द्वारा कार्यवाही शून्य।


पटना सुशासन की सरकार में सब कुछ चलता है सही को गलत और गलत को सही यह आज के मायने सुशासन की सरकार में हो रही है। बताते चलें कि 9 दिसंबर 2019 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक लिखित आवेदन पटना महानगर जनता दल यूनाइटेड के श्रमिक प्रकोष्ठ के लेटर हेड पर पटना जिला अधिकारी मिशन निर्देशक बिहार महादलित विकास मिशन पटना, जिला कल्याण पदाधिकारी को जांच उपरांत कार्रवाई करने की आवेदन भेजी गई थी। जिसकी अभी तक वरीय पदाधिकारी के द्वारा कार्यवाही शून्य और कार्रवाई पटना नगर निगम नूतन राजधानी वार्ड संख्या 11 के विकास मित्र नीतू कुमारी के कार्य में कोताही बरतने एवं माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा चलाए जा रहे सात निश्चय योजना के अंतर्गत शौचालय निर्माण में अवैध रूप से रकम की उगाही करना जैसे बहुत से मामलों को लिखित आवेदन के द्वारा द्वारा श्रीमान जिलाधिकारी महोदय, मिशन निर्देशक, जिला कल्याण को लिखित आवेदन के द्वारा स्पीड पोस्ट के माध्यम से सूचना की गई थी। पर उस जदयू के लेटर पैड पर की गई कंप्लेन को पटना जिले के जिलाधिकारी अभी तक कार्यवाई करने से वंचित नजर आ रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है की सत्ता पक्ष में चल रही सरकार की लेटर पैड की गरिमा को प्रशासनिक पदाधिकारी नजर अंदाज करते हुए जदयू के लेटर पैड को डस्टबिन में फेंक दिया जाता होगा। इस वजह से अभी तक किसी भी पदाधिकारी के द्वारा वार्ड संख्या 11 के विकास मित्र कार्य में कोताही बरतने एवं मुख्यमंत्री के द्वारा चलाए गए सात निश्चय योजना के अंतर्गत शौचालय निर्माण जैसे कार्यों में अनियमितता पर कार्रवाई नहीं की गई हैं।और विकास मित्र का मनोबल दिनप्रतिदिन बढ़ता जा रहा है इतना ही नहीं अगर किसी वार्ड की जनता को विकास मित्र से काम पड़ता है वाह पहले मिलने से इंकार करती है एवं अगर मिल जाती है तो सरकार की बताई गई योजना को दिलाने के एवज में पहले राशि की डिमांड की जाती है एवं नहीं देने पर उन्हें अभद्र शब्द का प्रयोग कर कहा जाता है जहां जाना है वहां जा सकते हैं मुझे किसी भी पदाधिकारी से कोई डर नहीं है मैं खुद अनुसूचित जाति से आता हूं और महिला भी हूं इस कारण से मुझे किसी भी पदाधिकारी से कोई भय नहीं है। यह सभी शब्द सुनकर वार्ड की जनता सरकार के द्वारा दी गई योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं।

*हावड़ा : दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप का हुआ आयोजन*….

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*हावड़ा : दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप का हुआ आयोजन*….

रिपोर्ट: नसीम रब्बानी के साथ मो.अनवार आज़ाद

पशिम बंगाल कोलकाता: नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के 123वें जयंती के अवसर पर हावड़ा के दासनगर स्थित अल्मोहन दास इंडोर स्टेडियम में ग्लोबल शोटोकान कराटे – डू एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन विभास हाजरा (पूर्व नगर निगम परिषद् सदस्य) के द्वारा किया गया।

इस प्रतियोगिता में नेपाल, भूटान, बांग्लादेश एवं श्रीलंका के लगभग 300 खिलाड़ियों ने भाग लिया।

इस चैंपियनशिप के चीफ ऑर्गनाइजर शिहान तारक नाथ सरदार ने सभी अतिथियों एवं राष्ट्रीय दलों को बधाई दी।
इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर भारत रहा, दूसरे स्थान पर नेपाल एवं तीसरे स्थान पर बांग्लादेश रहा।