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स्वास्थ्य

शरीर मे किसी भी गांठ को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी-डॉ विवेक मल्होत्रा

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शरीर मे किसी भी गांठ को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी-डॉ विवेक मल्होत्रा

सिटीसीएस फैमिली,अंजली फ़िल्म प्रोडक्शन एवम ओरिएट हेल्थकेयर की ओर से आयोजित हुआ स्तन कैंसर जागरूकता कार्यक्रम

लखनऊ। कैंसर का शुरुआती दौर यदि पता चल जाए तो किसी भी कैंसर से आसानी से उचित इलाज से बचाव किया जा सकता है और लाइफ साईकिल को बढ़ाया जा सकता है। ये बातें सिटीसीएस फैमिली , अंजली फ़िल्म प्रोडक्शन और ओरिएट हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से गुरुवार को लखनऊ के कुकरैल नाले के किनारे अकबर नगर द्वितीय में आयोजित स्तन कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में राम मनोहर लोहिया के पूर्व कैसंर सर्जन एवम चरक हॉस्पिटल के कैंसर सर्जन डॉ विवेक मल्होत्रा ने कही।
स्तन कैंसर के बारे में बताते हुए डॉक्टर विवेक ने बताया की स्तन कैंसर के मामले में दूसरे नम्बर पर है,जिसमे आठ में में से दो महिलाओं को यह हो सकता है। स्तन कैंसर की जानकारी यदि शुरुआती दौर में पता चल जाए
तो इलाज आसानी से संभव है।
पहली स्टेज में मरीज पूरी तरह से नब्बे प्रतिशत तक ठीक हो सकते है
ब्रेस्ट में गांठ होना इसका पहला संकेत है,यह सामान्यता बीस वर्ष से अधिक की महिलाओं को होने के चांसेस रहते है।अतः बीस वर्ष से ऊपर की महिलाओं को हर महीने खुद परीक्षण करने चाहिए,इसके लिए शीशे के सामने खड़े होकर स्तन के आकार का परीक्षण, फ्लैट हथेली से महसूस करना,एवम दोनों हाथों को कमर पर रखकर शीशे के सामने देखना आदि मुख्य तरीके है जिससे इसका घर पर परीक्षण किया जा सकता है।

स्तन कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में आई महिलाओं को ओरिएट हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के तरफ़ से पम्पलेट एवं पर्स बाटे गए साथ ही शपथ दिलाई गई की कम से कम दो लोगो को इसके बारे में ज़रूर जागरूक करेंगे। अंजली फ़िल्म प्रोडक्शन की हेड अंजली पांडेय एवम सिटीसीएस फैमिली के प्रेसिडेंट मनोज कुमार ने गणेश प्रतिमा देकर डॉक्टर विवेक मल्होत्रा को सम्मानित भी किया।
जागरूकता के इस कार्यक्रम में स्थानीय सोशल एक्टिविस्ट सुमन पांडेय,निशा एवं अली जान एवम ओरिएट हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड से विवेक राय मौजूद रहे।

शारीरिक परिवर्तन करना चाहते हैं तो रोज 1 कैप्सूल खाएं शरीर में होंगें ये 3 बदलाव

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शारीरिक परिवर्तन करना चाहते हैं तो रोज 1 कैप्सूल खाएं शरीर में होंगें ये 3 बदलाव

सदियों से महिलाएं त्वचा को स्वस्थ और सुंदर बनाने के लिए विटामिन ई युक्त उत्पादों का उपयोग करती आ रही हैं। लेकिन बदलते दौर में अब विटामिन ई अपनी उन्हीं तमाम खूबियों के साथ कैप्सूल के रूप में भी आसानी से उपलब्ध हैं। आपने विटामिन-ई के बारे में कई बार सुना होगा और पढ़ा भी होगा। कई फलों, तेलों और ड्राय फ्रूट्स में विटामिन-ई पाया जाता है, और यह सेहत के साथ-साथ सौंदर्य के लिए भी बेहद लाभदायक होता है। बालों, चेहरे और स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाने में सबसे बेस्ट है विटामिन E ऑयल. आप इसे कई तरीकों से चेहरे और बालों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं पने विटामिन-ई के बारे में कई बार सुना होगा और पढ़ा भी होगा। कई फलों, तेलों और ड्राय फ्रूट्स में विटामिन-ई पाया जाता है, और यह सेहत के साथ-साथ सौंदर्य के लिए भी बेहद लाभदायक होता है। बालों, चेहरे और स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाने में सबसे बेस्ट है विटामिन E ऑयल. आप इसे कई तरीकों से चेहरे और बालों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

1 बालों के लिए विटामिन E बहुत फायदेमंद है. यह बालों की लम्बाई बढ़ाता है, बाल चिकने और मुलायम होते हैं. बालों का सफ़ेद होना और दोमुंहे बालों की समस्या दूर होती है.
2 विटमिन ई को बादाम तेल के साथ मिक्स पर आंखों के नीचे लगाने से काले घेरे धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं। रात में सोने से पहले हल्के हाथों से आखों के नीचे के एरिया पर मसाज करें, 1-2 हफ्तों में ही इसका असर देखने को मिलेगा।
3 अगर आप रोजाना दो कैप्सूल खाते हैं, तो आपकी हेयर फाल की समस्या दूर हो जाएगी, क्योंकि विटामिन ई कमी से बाल बिल्कुल कमजोर हो जाते हैं और फिर झड़ने लगते हैं। बताते चले कि अगर आपको विटामिन ई की कमी से होने वाले लक्षण दिखे तो कैप्सूल के अलावा आपको हरी सब्जियां खानी शुरू कर देनी चाहिए। इसके अलावा आप ताजे फलों का जूस पीएं।

पी.एस.एम. ड्यूटी करने में होती है परेशानी-डॉ. चंदन चौधरी

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दरभंगा: पी.एस.एम. ड्यूटी करने में होती है परेशानी-डॉ. चंदन चौधरी

रिपोर्ट: एन. रब्बानी।
दरभंगा(बिहार)डॉ चंदन चौधरी से बात करने पे उन्होंने बताया कि पी.एस.एम की ड्यूटी “इंटर्न डॉक्टर” को 3 तीन जगह पे करनी परती है “दो महीने” के लिए,
जिसमे डी.एम.सी.एच- ओ.पी.डी 15 दिन, कल्याणपुर पी.एच.सी “1 महीना” एवं बहादुरपुर सी.एच.सी में “15 दिन” ड्यूटी करनी पड़ती है।
बहादुरपुर की दूरी तकरीबन 11-12 किलोमीटर है एवं कल्याणपुर की दूरी तकरीबन 70-72 किलोमीटर है।
इतना दूर आने-जाने का कोई साधन नही है, अपना भाड़ा लगाकर ऑटो एवं रिक्शा से जाना परता है, जिससे बहुत परेशानी होती है।
ऊपर से बेसिक सी जो सुबिधा होनी चाहिए, पानी एवं बाथरूम का उसमे भी कमी है।
पीने का पानी भी अपना ले जाना पड़ता है।
डॉ चौधरी ने बताया कि यहा डी.एम.सी.एच के “डी एडिक्शन वार्ड” का एरिया बढ़ाने का जरूरी है क्योंकि मनोरोग विभाग में रोजाना बहुत से पेशेंट “विथडरॉल सिंड्रोम” वाले आते है।
डॉ चौधरी कहते है मनोरोग विभाग में ड्यूटी करने पे महसूस हुआ कि बिहार में 2-3 “पागलखाना”(मेन्टल असायलम) की जरूरत है,जबकि एक भी पागलखाना बिहार में नही है।
मनोरोग विभाग में उचित गार्ड की जरूरत है, मरीज को संभालने के लिए,
क्योंकि मनोरोग विभाग में हमेशा मरीज के द्वारा “अप्रिय घटना” का संभावना बना रहता है।
डॉ चंदन चौधरी से गंदगी पे बात करने पे उन्होंने बताया कि डी.एम.सी.एच में डस्टबिन की बहुत कमी है खास कर “सेंट्रल इमरजेंसी” एवं “सी.सी.यू” में चारो तरफ “बायोमेडिकल वेस्ट” बिखरा रहता है जिससे संक्रमण का खतरा रहता है।

विश्व स्तनपान सप्ताह 1से 7 अगस्त तक मनाया जाएगा

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स्तनपान – जीवन की नींव

स्तनपान से शिशु को लाभ

1 मां की त्वचा का संपर्क शिशु के तापमान को बनाए रखता है

2 दूध उतरने में सहायक

3 शिशु की समुचित विकास

4 बौद्धिक स्तर में सुधार

5 शिशु और मां के बीच जुड़ाव

6 दस्त रोग निमोनिया कान व गले सक्रमण आदि का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है

7 मां के दूध में बच्चों के लिए आवश्यक प्रोटीन वसा कैलोरी लैक्टोज विटामिन लोहा खनिज पानी और एंजाइम प्राप्त मात्रा में होते हैं
8 मां का दूध पचने में त्वरित और आसान होता है

9 यह बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है जो कि भविष्य में उसे कई तरह के सक्रमण से सुरक्षित करता है

10 यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
11 यह किफायती और सक्रमण मुक्त होता है

स्तनपान कराने से माँ को लाभ

1 यह स्थान और डिंब ग्रंथि के कैंसर की संभावना को कम करता है
2 यह प्रसव पूर्व खून बहने और एनीमिया की संभावना को कम करता है
3 मां को अपनी पुरानी शारीरिक संरचना वापस प्राप्त करने में सहायक करता है । स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच समान्यतः मोटापा कम पाया जाता है
4 गर्भाशय का संकुचन होता है जिससे आवल आसानी से छूट जाती है
5 प्रसव प्रांत अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा कम हो जाता है

6 स्तन कैंसर गर्भाशय कैंसर तथा अंडाशय के कैंसर के खतरे कम हो जाते हैं
7 ऑस्टियोपोरोसिस (हडिडयों का कमजोर पड़न) के प्रकरण कम हो जाते हैं
8 परिवार नियोजन में कुछ हद तक सहयोग प्राप्त होता है
9 प्रसवोत्तर वजन घटाने में सहयोगी होता है।
10 शिशु के आहार पर व्यय पर संभावित लागत कम होती है

स्मोकिंग की आदत आपको भी कम उम्र में बना देगी बूढ़ा: सर्वे

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स्मोकिंग की आदत कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी तक को न्योता देती है। यह शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाती है, जिसमें से एक उम्र को कम करना भी है। अब एक हालिया स्टडी में सामने आया है कि स्मोकिंग न सिर्फ उम्र कम करती है बल्कि व्यक्ति को 20 साल जल्दी बूढ़ा भी कर देती है। यानी स्मोकिंग करने वाले युवक की उम्र 20 साल है तो उसकी क्रानलॉजिकल ऐज किसी 40 साल के शख्स की तरह हो सकती है
क्या है क्रानलॉजिकल और बायलॉजिकल ऐज
मानव शरीर की दो तरह की उम्र होती है, पहली तो क्रानलॉजिकल और दूसरी बायलॉजिकल। क्रानलॉजिकल ऐज वह है जो व्यक्ति के जन्म से गिनी जाती है, वहीं व्यक्ति किस उम्र का दिखता है, यह बायलॉजिकल ऐज में गिना जाता है।
स्टडी में क्या आया सामने
साइंटफिक रिपोर्ट में जारी हुई स्टडी के मुताबिक, स्मोकिंग के नुकसान को लेकर 149,000 अडल्ट्स का ब्लड टेस्ट किया गया। इससे यह सामने आया कि स्मोकिंग करने वाले युवाओं की क्रानलॉजिकल उम्र उनसे ऐज में डबल वाले नॉन स्मोकर्स लोगों के बराबर है। वहीं स्मोकिंग नहीं करने वालों की क्रानलॉजिकल ऐज उनके जन्म के समय के मुताबिक सटीक पाई गई। स्टडी में 10 में से 7 ऐसे स्मोकर्स जिनकी उम्र 30 से कम थी उनकी क्रानलॉजिकल ऐज 31 से 40 या 41 से 50 के बीच पाई गई। वहीं 62 प्रतिशत नॉन स्मोकर्स की उम्र सटीक पाई गई। स्टडी में शामिल कुल लोगों में से 49,000 लोग स्मोकर्स थे और उनकी ऐवरेज ऐज 53 पाई गई, जो चिंता का विषय है। स्टडी ऑथर पोलिना मौमोशिना ने कहा कि, स्मोकिंग लोगों की हेल्थ को तबाह करने और उम्र से पहले निधन की बड़ी वजह है। यह कई तरह की बीमारियों को न्योता देता है। उन्होंने कहा कि, स्टडी में नॉन स्मोकर्स के मुकाबले स्मोकिंग करने वालों की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में तेजी देखी गई, यह प्रक्रिया महिला व पुरुषों में समान दिखी।
स्टडी से पता चलता है कि स्मोकिंग की आदत से शरीर के इंटरनल वर्क को होने वाले नुकसान को लेकर अब तक जो अंदाजे लगाए जा रहे थे, सच्चाई उससे भी ज्यादा खतरनाक है। स्टडी से यह साफ है कि स्मोकिंग न सिर्फ बायलॉजिकल बल्कि क्रानलॉजिकल ऐज को भी प्रभावित करती है, जो खतरनाक है।