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बिहारराज्य

लोकगीत संध्या में छाए रहे भोले बाबा

By June 30, 2020 No Comments

लोकगीत संध्या में छाए रहे भोले बाबा 

सावन महिनवा सुहावन घटा घिरी आइल हे हरि 
रिपोर्ट:शशिभूषण कुमार

सोनपुर, 29 जून : साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था नव गीतिका लोक रसधार के तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में लोक कलाकारों ने बिहार के पारंपरिक गीतों की शानदार प्रस्तुति करके श्रोताओं का मन मोहा । रिमझिम बरसात ने सावन के आने की सूचना दे दी है । सावन का महीना भगवान शिव का महीना होता है, ऐसा मानते हुए कार्यक्रम में अनेक गायकों ने भोले बाबा से जुड़े लोकगीत गाए । वरिष्ठ लोक गायक और गीतकार भरत सिंह भारती की अध्यक्षता में आयोजित संध्या में लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत ने गणेश वंदना मंगल के दाता रउआ बिगड़ी बनाई जी गौरी के ललना हमरा अंगना में आई जी से कार्यक्रम की शुरुआत की और उसके बाद का ले के शिव के मनाईब जी शिव मानत नाहीं नचारी गीत पेश किया । कार्यक्रम में वरिष्ठ चित्रकार और कला समीक्षक मनोज कुमार बच्चन ने कहा कि  भारतीय लोकगीत की जड़ें उतनी ही प्राचीन है जितना ग्रामीण सभ्यता का इतिहास।लोकगीत में जनमानस की परंपरा,रीतिरिवाज, धार्मिक अनुष्ठान, संस्कार,ऋतु संबंधी गीत क्षेत्रीय भाषा में विस्तार पाती है।लोकगीत ग्राम्य जन जीवन के हर्ष-विषाद तथा उत्स-संस्कार का प्रतिनिधित्व करती है।”लोकगीत किसी संस्कृति के मुँह बोलते चित्र हैं।”  नीतु कुमारी नवगीत जी भले ही पटना जैसे नगर में रह रही हों मगर इनकी जड़ें ग्राम्य परिवेश कि गलियों से ही गुजरती हैं।लोकगायकी से लबरेज इनकी रूहानी आवाज लोककंठ की अवधारणा को साकार करता है। कोरोना महामारी ने  अन्य क्षेत्रों की तरह लोक कलाओं के लिए भी संकट खड़ा किया है । लेकिन जब चुनौतियां बड़ी होती हैं  तो कलाकारों  को भी  बड़ी दिलेरी के साथ  चुनौतियों का सामना  करना चाहिए ।  प्रतिष्ठित गायक प्रेम रंजन ने ” लें लें अइहा बालम बजरिया से चुनरी ” गाकर लोगों को झुमाया । छपरा के लोक गायक पिंटू पांडे ने पीसत पीसत भांग भोला हाथ मोर दुखाता लोकगीत गाया । मुजफ्फरपुर के लोक गायिका वैष्णवी ने हरि हरि सावन सर्व सुहावन घटा घिरी आइल हे हरि ने माहौल को हरा-भरा बना दिया । कार्यक्रम में वरिष्ठ लेखक और समीक्षक प्रो प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति के सच्चे प्रतिनिधि हैं । इन गीतों से हमारे संस्कार परिष्कृत होते हैं । आरा की नवोदित लोक गायिका मोनी सिंह ने निर्गुण गीत रहनी में बाबा के रे बगिया गाया जिसे सब ने खूब पसंद किया । वरिष्ठ लोक गायक भरत सिंह भारती ने कजरी गीत उमड़ी घुमड़ी घन शोर मचाबत ए रामा पेश करके सभी कलाकारों और श्रोताओं को झुमा दिया । कवयित्री और गीतकार नीलम श्रीवास्तव के कजरी गीत अरे रामा आई पावस ऋतु न्यारी ,बदरिया रिमझिम बरसे ना को भी सब ने खूब पसंद किया । कोरोना महामारी ने  अन्य क्षेत्रों की तरह लोक कलाओं के लिए भी संकट खड़ा किया है । मुजफ्फरपुर के प्रतिष्ठित गायक प्रेम रंजन ने ” लें लें अइहा बालम बजरिया से चुनरी ” गाकर लोगों को झुमाया । छपरा के लोक गायक पिंटू पांडे ने पीसत पीसत भांग भोला हाथ मोर दुखाता लोकगीत गाया । मुजफ्फरपुर के लोक गायिका वैष्णवी ने हरि हरि सावन सर्व सुहावन घटा घिरी आइल हे हरि ने माहौल को हरा-भरा बना दिया । कार्यक्रम में वरिष्ठ लेखक और समीक्षक प्रो प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति के सच्चे प्रतिनिधि हैं । इन गीतों से हमारे संस्कार परिष्कृत होते हैं । आरा की नवोदित लोक गायिका मोनी सिंह ने निर्गुण गीत रहनी में बाबा के रे बगिया गाया जिसे सब ने खूब पसंद किया । वरिष्ठ लोक गायक भरत सिंह भारती ने कजरी गीत उमड़ी घुमड़ी घन शोर मचाबत ए रामा पेश करके सभी कलाकारों और श्रोताओं को झुमा दिया । कवयित्री और गीतकार नीलम श्रीवास्तव के कजरी गीत अरे रामा आई पावस ऋतु न्यारी ,बदरिया रिमझिम बरसे ना को भी सब ने खूब पसंद किया । लोक गायक अरुण कुमार गौतम ने पटना सहरिया घुमा दा बालम गीत पेश किया ।

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