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प्रशासन और आम जन दोनों की असंवेदनशीलता, कहीं भारी ना पड़े देशवासियों को

By March 24, 2020 No Comments

कोविट-19 मात्र एक दिन की जागरूकता के बाद क्या ख़तरा टल गया
प्रशासन और आम जन दोनों की असंवेदनशीलता, कहीं भारी ना पड़े देशवासियों को

ए एस ख़ान
लखनऊ विश्वव्यापी महामारी कोविट-19-कोरोना वायरस को भारत में फैलने से रोकने हेतु जहां केन्द्र और प्रांतीय सरकारों ने दिन रात एक किए हुए हैं, वहीं आमजन, और प्रशासन मात्र इसे सांकेतिक दिशानिर्देश मानकर आचरण कर रहा है, जिसके कारण देश एक भीषण त्रासदी की ओर बढ़ता दिख रहा है ।
कोरोना के कहर की तस्वीरें और ख़बरें विदेशों से लगातार समाचार पत्रों एवं सोषल मीडिया के माध्यम से सामने आ रही है किंतु भारतीयों ने शायद इसे ठीक से समझना नहीं चाहा, या यूं समझो की वे इसे मात्र कुछ पलों के संकट के रूप में लेरहे है ।
वर्ना प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों, सहित अनेकों जागरुक लोगों की अपीलों, निवेदनों, के बाद भी आम आदमी जागरूकता का परिचय नहीं दे रहा है
देश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर रवीवार 22 मार्च को जनता कर्फ़यू के दौरान दिन भर पूरे देश में अभूतपूर्व समर्थन मिला तथा देशवासी घरों में कैद रहे, यह देखकर एक सुखद अहसास हुआ कि जनता जागरूक है तथा कोरोना को हराया जा सकता है ।
किंतु शाम होते ही यह भ्रम टूट गया ।
देश में इस आपदा की घड़ी में जान जोखिम में डालकर फ्रंट लाइन पर कार्य कर रहे डाक्टरों, प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ सेवाओं से जुड़े तथा प्रशासनिक कर्मचारियों, एवं एसी नाज़ुक घड़ी में भी समाचारों का संकलन करने हेतु निकलने वाले मीडिया कर्मियों के उत्साहवर्धन हेतु थाली तथा ताली बजाने के निवेदन को समाज ने ऐसे मनाया मानो कोरोना का विनाश कर जश्न मना रहे हों ।
जगहां जगहां जुलूसों के रूप में भीड़ के साथ थाली,घंटा, बजाते लोगों ने तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर स्वंय को यौद्धा साबित करने के प्रयास किए ।
ऐसा लगा कि जैसे ये प्रधानमंत्री की अपील का मज़ाक उड़ाकर कोरोना को दावत दे रहे हैं ।
यही नहीं दूसरे दिन सोमवार को भी आमजन ने घोर लापरवाहियां जारी रखीं, लोग सड़कों पर भी निकले, गलियों में मजमा भी लगा दुकानें भी खुलीं तथा भीड़भाड़ भी रही ।
इस दौरान प्रशासन केवल व्यसत सड़कों पर एवं चौराहों पर ही सख़्ती करता दिखा जहां से अधिक तर मीडिया कर्मी, एवं आवश्यक वस्तुओं को लेजाने वालों के वाहन ही निकल रहे थे ।
कोरोना की विभीषिका की जितनी अनदेखी आमजन कर रहा है, उतनी ही प्रशासन विषेश कर पुलिस प्रशासन भी ।
समाचारों का संकलन करने निकले पत्रकारों से पुलिस का व्यवहार अनूकूल नहीं था ।
दूसरी ओर स्वासथ सेवाओं से जुड़े अधिकारी,कर्मचारी, एवं आला प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद सजगता तत्परता, से अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह करते दिखे, जिसमें लखनऊ जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, कमिश्नर, एवं सहयोगीयों की कार्यशैली सराहनीय रही ।
वहीं थाना चौकी स्तर के पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली कहीं से संतोषजनक नहीं दिखी ।
आमजन एवं प्रशासन के इस उदासीन रवैए, एवं हठधर्मिता के चलते कैसे कोरोना काबू में आयेगा, ये चिंता का विषय है ।
क्या ही अच्छा हो की संवेदनशील परिस्थितियों में गठित की जाने वाली शांती कमेटियों की तरह मोहल्ला वार जागरूकता कमेटियों के माध्यम से गली गली जागरूकता अभियान चलाया जाता, तथा थाना चौकी स्तर पर निरंतर गश्त का विषेश कर गलियों में निरंतर चौकसी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती ।
कोरोना का रोना मात्र एक दिन का नहीं था जिसे ताली,थाली,घंटा, बजाकर मिटा दिया गया ।
यह मौत बनकर समूचे विश्व पर मंडरा रहा है तथा यह सीमाएं, धर्म,जाती, वर्ग, नहीं देखता बल्की पूरी मानवता को ग्रास बनाना चाहता है, और भारत भी इसकी चपेट में है ।
कोरोना का मात्र जागरूकता से हराया जा सकता है और प्रशासन के निर्देश वैज्ञानिक आधार पर हैं इन्हें मानकर ही इस आपदा से मुक्त हो सकते हैं ।
अन्यथा त्रासदी निश्चित है ।

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