Breaking News

उत्तर प्रेदश:- योगी जी की विकास की राहें अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है !
उत्तर प्रेदश:- रंगरलियां मना रहे दो जोड़ो की हुई जमकर पिटाई
देश:- प्रधानमंत्री ने कहा कि सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण विधेयक एक ऐतिहासिक कदम है जो गरीबों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है
देश:- स्वच्छ भारत मिशन खुले में शौच से मुक्त भारत के लक्ष्य प्राप्ति की ओर
देश:- मेघालय में पहली ‘स्वदेश दर्शन’ परियोजना का उद्घाटन
देश:- रेल संरक्षा में भारत-जापान सहयोग के लिए रेलमंत्रालय ने चर्चा रिकॉर्ड पर हस्‍ताक्षर किये |
बिहारराज्य

चमकी पर चर्चा ने बचाई एईएस प्रियांशी की जान

By June 29, 2020 No Comments

चमकी पर चर्चा ने बचायी एईएस से प्रियांश की जान

रिपोर्ट:नसीम रब्बानी

दो बार एईएस से प्रभावित हो चुका है प्रियांश
जागरुक पिता ने तुरंत अस्पताल पहुंचा बचायी प्रियांश की जान

मुजफ्फरपुर।

किसी भी विषय पर जब खुल कर चर्चा हो तो उसमें शामिल हरेक व्यक्ति कुछ ज्ञान तो लेकर ही जाता है। ऐसा ही कुछ कुढ़नी प्रखंड में पछुवन गांव के सतीश कुमार सागर के साथ हुआ। सतीश ने बताया कि 16 मई को ही गांव में पीएचसी से डॉक्टर साहब ने चमकी पर चर्चा की थी। उस चर्चा में चमकी को पहचानने से लेकर प्राथमिक तौर पर निपटने के बारे में भी बताया। वह भी उस चर्चा में शामिल थे. शामिल डॉक्टर साहब की बातों को उन्होंने ध्यान से सुना। नतीजा है कि चर्चा में शामिल बातों को अमल में लाकर ही वह अपने बेटे को एईएस के व्यूह से बाहर निकाल सके.

2 दिनों के ईलाज के बाद स्वस्थ हुआ प्रियांश:

सतीश 18 मई की सुबह की घटना बताते हुए कुछ भावुक हो जाते हैं। वह कहते हैं 17 मई की रात को ही उन्होंने अपने बेटे प्रियांश को रोटी एवं भुजिया खिला कर सुलाया था। लेकिन 18 मई की सुबह को प्रियांश के मुंह से झाग निकलने, सर का दाहिनी तरफ घूम जाने और लगातार झटके आने को देखकर सतीश को दो दिन पहले चमकी बुखार पर हुयी चर्चा याद आ गयी. सतीश ने स्थिति की गंभीरता को भांप कर प्रियांश को बिना देर किए कुढ़नी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए. वहां के चमकी वार्ड में तुरंत ही उसे भर्ती लिया गया एवं प्राथमिक उपचार के बाद फिर उसे अस्पताल के एम्बुलेंस से ही एसकेएमसी हॉस्पिटल भेज दिया गया, जहां दो दिन के ईलाज के बाद प्रियांश को डिस्चार्ज किया गया.

15 दिन बाद जब दुबारा चमकी से हुआ पीड़ित :

सतीश कहते हैं जब 20 मई को प्रियांश ठीक होकर घर तो आ गया, लेकिन ठीक 15 दिन बाद सुबह 7 बजे फिर से उसके शरीर में झटके आने लगे। मुंह से झाग आने लगे. बिना देरी किये फिर प्रियांश को को कुढ़नी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां से प्राथमिक ईलाज के बाद उसे फिर एसकेएमसी हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया. लगभग एक हफ्ते के बाद वह स्वस्थ्य होकर आया। उसके बाद वह अभी स्वस्थ्य है।

चमकी पर चर्चा ने बचायी जान:

सतीश के अनुसार उसके बेटे की जान जिला प्रशासन के द्वारा चलाए जा रहे चमकी पर चर्चा के कारण ही बच पायी है। प्रियांश के एईएस से पीड़ित होने से दो दिन पहले ही शनिवार को गांव में चमकी पर चर्चा का आयोजन हुआ था, जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से आए डॉक्टर ने एईएस के लक्षणों को पहचानने की जानकारी दी गयी थी. सतीश ने बताया चर्चा के दौरान बताया गया था कि यदि बच्चे में चमकी बुखार के लक्षण दिखाई दे तब जिस स्थिति में बच्चे का शरीर हो उसी स्थिति में बच्चे को अस्पताल लाएं. ओझा -गुणी के चक्कर में न फंसे. उन्होंने बताया इस बात पर जोर दिया गया था कि एक से दो घंटे के अंदर बच्चे को लाने पर उसकी जान आसानी से बचायी जा सकती है. सतीश ने भी ठीक उसी तरह किया बच्चे के सिर को भी नहीं घुमाया और उसी हालत में उसे अस्पताल पहुंचाया।

डॉक्टर हमेशा पूछते रहे हाल-चाल:

सामुदायिक केंद्र कुढ़नी में कार्यरत डॉ धर्मेन्द्र हमेशा ही बच्चे के ठीक होने के बाद हाल-चाल लेते रहे। प्रियांश के पिता कहते हैं डॉक्टर साहब ने अस्पताल में भी तत्परता दिखायी थी। वहीं बच्चे के ठीक होने पर उसके पोषण संबंधी बातें भी बताते थे। इस बाबत डॉ धर्मेन्द्र कहते हैं हरेक पिता को सतीश से सीखना चाहिए। उसने प्रियांश को लाने में तत्परता दिखाई तो उसकी जान बच पायी। एईएस में जागरुकता और तत्परता ही एकमात्र ईलाज है।

Leave a Reply