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खतरों के बीच डॉ दास पूर्णता से संभाल रहे जिले में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी

By July 9, 2020 No Comments

खतरों के बीच डॉ दास पूर्णता से संभाल रहे जिले में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी

रिपोर्ट:नसीम रब्बानी

जिले में नियमित करायी सामान्य स्वास्थ्य सुविधाएं -केयर के डीटीएल सौरभ तीवारी ने शुरुआत से ही दिया तकनीकी पक्ष से सहयोग

मुजफ्फरपुर। 9 जुलाई :

कोरोना संक्रमण से सभी हताहत हैं। डॉक्टर और स्वास्थ्य पदाधिकारी भी इस संक्रमण की जद में धीरे-धीरे शामिल होते जा रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल शहर का भी है। जिला स्वास्थ्य समिति के सिविल सर्जन सहित करीब आधा दर्जन डॉक्टर और पदाधिकारी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाओं को बहाल करना एक चुनौती भरा काम है। स्वास्थ्य विभाग के इस विपत्ति काल में सदर अस्पताल में विशेषज्ञ के रुप में कार्यरत डॉ सीके दास ने कमान संभाली है। उनकी कोशिश है कि आम नागरिकों को आम दिनों की तरह ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिले। इसके लिए वह सतत् प्रयासरत भी हैं।

सैंपलिंग से लेकर कोविड केयर तक जिम्मेवारी:

यह सच है कि कोरोना संक्रमितों के बीच जाकर लोगों की सैंपलिंग करना आसान नहीं है। वहीं उससे भी चुनौतिपूर्ण काम है कोविड केयर सेंटर की सतत निगरानी और वहां भर्ती मरीजों की देखभाल करना। इन सभी कार्यों को पूरे ही मनोयोग से डॉ दास पूरा कर रहे हैं। वहीं इस काम में कोविड के शुरुआती दौर से ही साथ दे रहे हैं केयर जिला संसाधन ईकाई के डीटीएल सौरभ तीवारी। इन दोनों के सहयोग और सुपरविजन में ही जिले में कोरोना के मामलों को हैंडल किया जा रहा है। जिसमें उचित पोषण और देखभाल के बदौलत ही मरीज बिना किसी परेशानी के यहां से ठीक होकर भी जा रहे हैं। वहीं आंकड़ों के संरक्षण का काम जयशंकर प्रसाद के द्वारा किया जाता है, जिससे लोगों तक जिले के सही आंकड़ें पहुँच पाती है। वह इस आंकड़े को बिहार और भारत सरकार को भी भेजते हैं।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर कोई असर नहीं:

डॉ चंद्रजीत दास कहते हैं उनके पास कोविड-19 की जिम्मेदारी तो थी ही साथ में पदाधिकारियों के आइसोलेशन के बाद सामान्य स्वास्थ्य की सुविधाओं को लागू रखना बड़ी चुनौती थी। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को मानसिक बल देना बहुत जरुरी होता है। उन्होंने बताया उन्होंने उनके साथ काम किया ताकि उनकी हिचक टूटे। वह हर वैसी जगह गए, जहां खतरे ज्यादा थे, पर कुछ सावधानियों को ध्यान में रखा जाय तो उन खतरों से बचा जा सकता है। वह दिन में अभी करीब 15 से 16 घंटे कार्य कर रहे हैं। वह स्वास्थ्यकर्मियों के बीच भी जाते हैं ताकि उनका मनोबल बना रहे। उन्होंने जेनरल ओपीडी, प्रसव, टीकाकरण, पैथेलॉजी सभी को चालू रखा। वह कहते हैं, इसके साथ उन्होंने एहतियात के तौर पर लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने की अपील किया ताकि वे यहां से ईलाज करा कर जाएं। बीमारी लेकर नहीं।

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