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अम्बेडकरनगर

कोविड-19 (कोरोना वायरस) से दुनिया के सभी इंसानों को सबक सीखने की दरकार : सैय्यद आबिद हुसैन

By April 10, 2020 No Comments

ज़ाहिद नक़वी

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मानवता ईश्वर के संस्था परिषद

इंसान कुदरत की सबसे उत्कृष्ट जाति मानी जाती है और वह भी खुद को खुदा के सबसे निकट मानता आ रहा है। कई बार तो वह अपने को परमात्मा तक घोषित करने में पीछे नहीं रहता। हालांकि वह भी प्रकृति की तमाम कृतियों, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े की ही तरह से एक प्रजाति है, जिनको सिर्फ और सिर्फ जरूरत होती है पेट भरने की चारों की और किसी न किसी बहाने रात या दिन उसकी इच्छा के मुताबिक आराम करने की। वह भी आदमी की ही तरह से सांस लेता है खाता-पीता है अपने परिवार और कुनबे मेंं खुश रहता है। आदमी की ही तरह से उसमें भी वंशवृद्धि की क्षमता होती है, जो सभी सजीवों में कुदरत प्रदत्त है। इन सबके के बीच आदमी ने खुद को सबसे अलग रखा, तरक्की के साथ चांद-सितारों तक पहुंच गया। आदमी ने प्रकृित रचित अपनी जैसी अन्य रचनाओं को नुकसान तो पहुंचाया है पर खुद का भी दुश्मन बन बैठा। यह रही है उसकी लिप्सा, लालच, ईर्ष्या। इसमें वह भूल गया कि उसकी जरूरत सिर्फ और सिर्फ दो रोटी है पेट भरने के लिए। सामाजिक प्राणी होने के नाते उसे तन ढकने की लिए कपड़े की भी जरूरत है। लेकिन इन सबके बीच उसने खुद को एेसी जगह खड़ा कर लिया जहां वह कुदरत से कोसों दूर हो गया। कोरोना वायरस संक्रमण के आज के हालात पर नजर डालें तो वही आदमी जो खुद को खुदा की उत्तम रचना मानता था अब सिर्फ निवाले और वजूद की दुहाई दे रहा है। काश किसी तरह बच जाएं। बड़े से बड़े देश और धनाड्य भी इसी कतार में खड़े हैं। वैसे तो लिखना नहीं चाहिए लेकिन हकीकत यह है कि इस महामारी ने आदमी को उसकी औकात बता दी है। ईश्वर सभी को इससे बचाए और हम उम्मीद भी करते हैं कि इस संकट से हम उबर कर फिर निखरेंगे, लेकिन सवाल यह है कि क्या हम इससे सबक लेंगे, खुदा बनने की कोशिश नहीं करेंगे, तरक्की करेंगे लेकिन कुदरत को साथ लेकर।

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